जनसंख्या गत्यात्मकता का एक भौगोलिक अध्ययनः अमेठी जनपद (उ0प्र0) के विशेष संदर्भ में।
हिमांशु मिश्रा1, प्रो. (डॉ.) इन्दू मिश्रा2
1शोध छात्र (जे.आर.एफ.), भूगोल विभाग, वी.एस.एस.डी. कॉलेज, कानपुर(उ.प्र.)
2प्रोफेसर, भूगोल विभाग, वी.एस.एस.डी. कॉलेज, कानपुर (उ.प.)
*Corresponding Author E-mail: himashumishra392@gmail.com
ABSTRACT:
जनसंख्या गत्यात्मकता जनसंख्या के विभिन्न जनांकिकीय संघटकों में समय के अनुसार हुए परिवर्तनों और क्षेत्र विशेष में इन परिवर्तनों के कारण उत्पन्न हुए प्रभावों के समग्र रूप में अध्ययन और विश्लेषण से सम्बन्धित है। जनसंख्या गत्यात्मकता के अन्तर्गत इसके विभिन्न घटक जैसे जन्म दर और मृत्यु दर, जनसंख्या वृद्धि, प्रजननता, मर्त्यता, जनसंख्या प्रवास नगरीकरण लिंगानुपात आयु संरचना, जनसंख्या घनत्व धर्म, भाषा आदि मात्रात्मक वस्तुस्थित परक अवधारणओं के आधार पर क्षेत्र विशेष में हुए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों का अध्ययन किया जाता है। प्रस्तुत शोध पत्र में अमेठी जनपद (उ0प्र0) के जनसंख्या गत्यात्मकता का अध्ययन और विश्लेषण शामिल है। जनसख्या ही वह प्राथमिक कारक है, जो संसाधनों के पूर्ण समावेशी संसाधन दोहन को सुनिश्चित करता है। शोध हेतु साक्षात्कार और प्रश्नावली विधि से अध्ययन क्षेत्र में प्राथमिक आंकड़ों को संग्रह किया गया है। तथ्यों की स्पष्टता और विश्लेषण हेतु सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं तथा पत्र पत्रिकाओं से प्राप्त सांख्यिकीय आंकड़ों का प्रयोग किया गया है। सामाजिक आर्थिक तथ्यों के विश्लेषण हेतु यथा स्थान पर ग्राफ, रेखा चित्र व मानचित्रों का प्रयोग किया गया है। प्रस्तुत शोध पत्र गुणात्मक विश्लेषणात्मक प्रकृति का है। अध्ययन क्षेत्र के समग्र समावेशी विकास हेतु जनसंख्या गत्यात्मकता के मात्रात्मक तथ्यों द्वारा प्राप्त निष्कर्षों द्वारा सुझावकारी प्रस्ताव प्रस्तुत कर सामाजिक न्याय और सामाजिक आर्थिक विकास सुनिश्चित करना शोध पत्र का मुख्य उद्देश्य है। जिससे की शोध पत्र के प्राप्त निष्कर्षों द्वारा सरकार योजना और नीतियों के निर्माण हेतु क्षेत्र के समावेशी विकास हेतु प्रयोग कर सके।
KEYWORDS: गत्यात्मकता, जनसंख्या, भौगोलिक, संसाधन।
izLrkouk % &
जनांकिकीय तथा जनसंख्या अध्ययन में किसी क्षेत्र की जनसंख्या में होने वाले परिवर्तन का विशेष महत्व होता है। क्योंकि इसके द्वारा वहां की आर्थिक प्रगति, सामाजिक-सांस्कृतिक दशाओं, ऐतिहासिक पृष्टभूमि, राजनीतिक विचारों एवं दशाओं आदि का ज्ञान होता है। इसके द्वारा ही जनांकिकीय (जनसांख्यिकीय) तथा उससे सम्बन्धित अन्यान्य तथ्यों की जानकारी प्राप्त होती है। 20वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में विश्व के अनेक देशों में उत्पन्न जनसंख्या विस्फोट की समस्या, खाद्य पदार्थ तथा अन्य जीवनोंपयोगी साधनों की बढ़ती मांग जनसंख्या वृद्धि से उत्पन्न पर्यावरणीय क्षति तथा जीवन स्तर में ह्नास आदि जनसंख्या वृद्धि जन्य समास्याओं ने जनसांख्यिकीय विदों, अर्थशास्त्रियों, भूगोलवेत्ताओं और अन्य समाज विज्ञानियों का ध्यान जनसंख्या परिवर्तन के अध्ययन की ओर आकर्षित किया है। वास्तव में किसी देश या क्षेत्र में होने वाला जनसंख्या परिवर्तन उसकी जनांकिकीय गतिशीलता का केन्द्र बिन्दु होता है। जहां से अन्य जनांकिकीय तत्वों की माप की जा सकती है। जनसंख्या सरंचना के निर्धारण में इसकी मुख्य भूमिका होती है। अतः जनसंख्या गत्यात्मकता के द्वारा किसी क्षेत्र की जनसंख्या सरंचना को समझना सुगम हो जाता है। जनसख्ंया परिवर्तन का अर्थ है एक निश्चित अवधि में किसी क्षेत्र विशेष में रहने वाले व्यक्तियों की संख्या में होने वाला परिवर्तन, यह परिवर्तन धनात्मक या सकारात्मक और ऋणात्मक या नाकारात्मक दोनों प्रकार का हो सकता है। जनसंख्या परिवर्तन की अवधि कुछ भी हो सकती है। किन्तु सामान्यतः जनसंख्या परिवर्तन का अध्ययन 10 वर्षीय अवधि के लिए किया जाता है। क्योंकि दो क्रमिक जनगणनाओं के मध्य की अवधि है और इसके अनुकूल महत्वपूर्ण जनांकिकीय सूचनाएं प्राप्त होती हैं।
अध्ययन क्षेत्र: -
अमेठी भारत के उत्तर प्रदेश राज्य में स्थित एक प्रमुख जनपद है गौरीगंज अमेठी जनपद का प्रशासनिक मुख्यालय है। यह जनपद अवध क्षेत्र में अयोध्या मण्डल का एक हिस्सा है। अमेठी जनपद समुद्र तल से 101 मीटर (331 फीट) की औसत ऊँचाई पर स्थित है कुल क्षेत्रफल लगभग 3063 वर्ग किलोमीटर है सतह समतल है। प्रमुख नदी गोमती जिले के केन्द्र से होकर गुजरती है। अमेठी जनपद का आक्षांश और देशांतरी विस्तार 2609’छ और 81049’म् देशांतर पर स्थित है। अमेठी उत्तर प्रदेश का 72वां जिला है, जो 1 जुलाई 2010 को तत्कालीन सुल्तानपुर जिले की तीन तहसीलों अमेठी, गौरीगंज और मुसाफिरखाना और तत्कालीन रायबरेली जिले की दो तहसीलों अर्थात सलोन और तिलोई को मिलाकर बनाया गया। 2011 की जनगणना के अनुसार अमेठी जनपद की कुल जनसंख्या 1867000 है। जनपद का लिंगानुपात प्रति 1000 पुरूषों पर 983 महिलाओं का है। पुरूष तथा स्त्रियों का प्रतिशत इस प्रकार है 945000 पुरूष (50.6ः) और 922000 महिलाएं (49.4ः) है। शहरी आबादी 5.67ः है। कुल साक्षरता 69.72ः है जिसमें स्त्रियों की 58.28ः की तुलना पुरूषों की साक्षरता 80.19ः है। जनपद की 94.32ः जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों मे निवास करती है, जिनकी आजीविका का मुख्य साधन कृषि और कृषि आधारित उद्योग है।
चित्र 1:- जनपद अमेठी की अवस्थिति, स्रोत-इंटरनेट।
शोध अध्ययन का उद्देश्य:-
1. अमेठी जनपद में जनसंख्या की स्थिति का आंकलन करना।
2. जनसंख्या गत्यात्मकता के घटकों का विश्लेषण करना।
3. जनसंख्या गत्यात्मकता से उत्पन्न प्रभावों का विश्लेषण करना।
4. जनसंख्या गत्यात्मकता का ग्रामीण विकास संसाधन के रूप में अध्ययन और विश्लेषण करना।
5. अध्ययन क्षेत्र में जनप्रतिक्रिया आधारित सुधार और अपेक्षित निष्कर्ष को प्रस्तावित करना।
आंकड़ा स्रोत तथा विधितंत्र:-
प्रस्तुत शोध पत्र व्याख्यात्मक और विश्लेषणात्मक अनुसंधान पर आधारित है। इसके अन्तर्गत पूर्व निर्धारित परिकल्पनाओं का तत्कालिक परिस्थितियों के सन्दर्भ में परीक्षण किया गया है। प्रस्तुत शोध पत्र में प्राथमिक आंकड़ों (साक्षात्कार और प्रश्नावली) तथा द्वितीय स्रोत से प्राप्त आंकड़े (जिला सांख्यिकीय पत्रिका, राष्ट्रीय जनगणना तथा जिला हथकरघा कार्यालय व तहसील और विकासखण्ड कार्यालय) से प्राप्त आंकड़ों का प्रयोग किया गया है। राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण के आंकड़ो तथा अन्य सरकारी संस्थाओं के आंकड़ो की सहायता ली गयी है शोध में विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित नगरीकरण से सम्बन्धित लेखों की सहायता ली गयी है। अध्ययन में अवलोकन तथा अनुभवाश्रित विधि का प्रयोग किया गया है। जनसंख्या के गत्यात्मक घटकों के विश्लेषण और व्याख्या हेतु और यथा आवश्यक स्थान पर मानचित्र और रेखाचित्रों तथा ग्राफ का प्रयोग किया गया है।
परिणाम एवं परिचर्चा:-
जनसंख्या आकार की दृष्टि से भारत चीन के पश्चात विश्व का द्वितीय वृहत्तम राष्ट्र है। भारत के 2.4ः पर विश्व की 17ः जनसंख्या निवास करती है। उसी प्रकार अमेठी जनपद उत्तर प्रदेश में भी प्रदेश के कुल क्षेत्रफल के 0.95ः भाग पर 0.93ः जनसंख्या निवास करती है जनपद की सामान्य जनांकिकीय विशेषताओं का शोधार्थी द्वारा अवलोकन और विश्लेषण किया गया है। 2011 के जनगणना के अनुसार अमेठी जनपद की कुल जनसंख्या 1867000 है। जनपद में लिंगानुपात प्रति 1000 पुरूषों पर 983 महिलाओं का है। पुरूषों तथा स्त्रियों का प्रतिशत इस प्रकार है 945000 पुरूष (50.6ः) है और 922000 महिलाएं (49.4ः) है। कुल साक्षरता 69.72ः है जिसमें स्त्रियों की 58.28ः की तुलना पुरूषों की साक्षरता 80.19ः है। शहरी आबादी 5.67ः है। जनपद की 94.32ः जनसंख्या ग्रामीण क्षेत्रों मे निवास करती है। अनुसूचित जातियों की जनसंख्या 471000 है जो की कुल जनसंख्या का 25.23ः है इसी प्रकार अनुसूचित जनजातियों की संख्या 300 है जो कि 0.016ः है। जनपद में गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले परिवारों की संख्या में ग्रामीण और नगरीय परिक्षेत्र के अनुसार भिन्नता है। ग्रामीण (बी.पी.एल.) की संख्या 352700 तथा शहरी (बी.पी.एल.) की संख्या 6930 है अवधि 2021-22 में आबाद ग्रामों की संख्या 976 है।
तालिका 1:- जनपद में आबाद ग्रामों का विवरण
तलिका 2:- जनपद में आयु-वर्ग के अनुसार स्त्री-पुरुष की संख्या
उपर्युक्त तालिका के विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि जनपद की अधिकतर आबादी 21-60 आयु वर्ग की है जो कि जनाकिकीय लाभांश और कार्यशील जनसंख्या के रूप में होती है क्षेत्र में साक्षात्कार द्वारा आकड़ों के निष्कर्ष से ज्ञात हुआ है कि यह आबादी शिक्षा और कौशल के आभाव के कारण बेरोजगार और आश्रित है। क्षेत्र में छिपी बेरोजगारी का प्रभाव है। अधिकांश जीविका का आधार कृषि और कृषि आधारित उद्योग है।
तालिका 3:- ग्रामीण जनसंख्या की प्रति 10 वर्ष की जनसंख्या वृद्धि (2011)
तालिका-3 के अवलोकन और प्रत्यक्ष दर्शन साक्षात्कार के आधार पर यह निष्कर्ष है कि समग्र दशकीय वृद्धि नकारात्क है जैसे 2001 से 2011 के बीच दशकीय वृद्धि .7.38ः रही। सर्वाधिक दशकीय वृद्धि सिम्हपुर विकासखण्ड में 25.06ः तथा सबसे कम गौरीगंज विकासखण्ड .2.63ः रहा जनसंख्या वृद्धि का सीधा संबंध साक्षरता और आजीविका के साधनों से है जिसका प्रभाव इस पर दिखाई पड़ता है।
तालिका 4:- जनपद में विकासखण्ड वार साक्षर व्यक्ति तथा साक्षरता प्रतिशत (2011)
उपर्युक्त तालिका के विश्लेषण से ज्ञात हुआ है कि जनपद में 2001 से 2011 की जनगणना के अनुसार साक्षरता में वृद्धि दर्ज हुई है। 2001 में कुल साक्षरता 48.49ः थी तथा 2011 में 69.72ः है। सर्वाधिक साक्षरता संग्रामपुर विकासखण्ड में 72.87ः है तथा सबसे कम बहादुरपुर विकासखण्ड में 55.13ः है। शोध के निष्कर्ष से ज्ञात होता है कि क्षेत्र में सर्वाधिक जनसंख्या हिन्दू की 82.16ः तथा मुस्लिम की 17.13ः, इसाई 0.12ः, शेष अन्य सिक्ख 0.04ः, बौद्ध 0.23ः, जैन 0.01ः हैं। शेष अन्य 0.01ः, सर्वेक्षण में 0.27ः लोगों ने अपना धर्म नहीं बताया।
तालिका-5 विकासखण्डवार जनसंख्या का आर्थिक वर्गीकरण
शोध अध्ययन से ज्ञात हुआ है कि क्षेत्र के अधिकांश लोगों का जीवन यापन कृषि और कृषि श्रमिक के रूप में है क्षेत्र के अधिक संख्या में सर्वाधिक कृषक सिम्हपुर विकासखण्ड (11079) में तथा सबसे कम संग्रामपुर विकासखण्ड में (5623) है। जनपद में भाषायी विविधता इस प्रकार है-हिन्दी कुल जनसंख्या का 96.83ः तथा उर्दू 3.08ः तथा पंजाबी 0.02ः तथा बंगाली 0.02ः तथा अन्य 0.05ः है। भाषायी विविधता और धार्मिक विविधता क्षेत्र विशेष की समावेशी संस्कृति को व्यक्त करती है। आयोध्या मण्डल में होने के कारण अमेठी जनपद पर हिन्दू संस्कृति की बहुलता है।
निष्कर्ष:-
शोध अध्ययन क्षेत्र जनपद अमेठी में पर्याप्त जनांकिकीय विविधिता दिखाई पड़ती है प्राथमिक तथा द्वितीयक आंकड़ों के समग्र एकीकृत विश्लेषण से ज्ञात होता है कि मुख्य शहर और शहरी क्षेत्र से लगे हुए परिवहन और आवश्यकता की पूर्ति से सेवा केन्द्रों वाले विकासखण्ड में जनसंख्या संकेंद्रित हो रही है। यद्यपि दशकीय वृद्धि जनसंख्या का प्रतिशत नकारात्मक है तथापि जनसंख्या का संकेंद्रण शहरों की ओर तेजी से हो रहा है। शिक्षा के आभाव और संरचनात्मक विकास में धीमेपन के कारण कार्यशील जनसंख्या आयुवर्ग के लोग छिपी बेरोजगारी के रूप में कार्यशील हैं जो अनुत्पादक है। क्षेत्र में उद्योग धंधो का निम्न विकास हुआ है। यद्यपि सरकार के एक जनपद एक उत्पाद के प्रोत्साहन योजना से मुंज उत्पाद उद्योग की वृद्धि हो रही है। अधिकांश कृषक भूमिहीन है जो कृषक श्रमिक के रूप कार्यरत हैं। क्षेत्र में जनसंख्या संसाधन अनुपात उच्च है। अर्थात पर्याप्त व्याप्त संसाधन के अनुसार क्षेत्र का विकास नहीं हो पाया है। जन प्रतिक्रिया आधारित प्रश्नावली, साक्षात्कार से ज्ञात हुआ है कि सरकारी योजनाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और कर्मचारियों की उदासीनता के कारण आवश्यक लोगों तक लाभ नही मिल पा रहा है। बिचौलिये की भूमिका अधिक है। जागरूकता के आभाव में लोग अपने अपेक्षित अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। सरकारी तथा गैर सरकारी संस्थाओं को कौशल विकास तथा प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों की आवश्यकता है जिससे कार्यशील जनसंख्या उत्पादक हो सके।
संदर्भ सूची:-
1. Abidum, J.O: (1983) Accelerated Urbanization and the Problem of Urban Peripheries, the case of Nigeria, India Journal of Regional Science. P. 1-7
2. Northan, R.M. (1975): Urban Geography, John Willey & Sons, New York. P. 11-17
3. District census hand book, Amethi, 2022 P. 1-28
4. Mishra, H.N. (1987) Rural Geography, Heritage Publishers, New Delhi. P. 15-27
5. मौर्या, एस.डी, 2005ः अधिवास भूगोल, शारदा पुस्तक भवन, इलाहाबाद (प्रयागराज) पेज नं0 88-95
6. मौर्या, एस.डी, 2015ः जनसंख्या भूगोल, शारदा पुस्तक भवन, इलाहाबाद (प्रयागराज) पेज नं0 17-35
7. गौतम, अलका, 2014ः संसाधन एवं पर्यावरण, शारदा पुस्तक भवन, इलाहाबाद (प्रयागराज) पेज नं0 95-103
8. हुसैन, माजिद (2004)ः कृषि भूगोल, रावत पब्लिकेशिंग हाउस, नई दिल्ली। पेज नं0 7-14
|
Received on 20.09.2023 Modified on 30.09.2023 Accepted on 10.10.2023 © A&V Publication all right reserved Int. J. Ad. Social Sciences. 2023; 11(4):230-235. DOI: 10.52711/2454-2679.2023.00037 |